Simple Surya Mantra and Remedy for Success

Many of our regular readers often ask me why they are not getting success in fulfilling any desire or successfully completing any work or task or why they are getting only partial success in anything done by them.
Hence, in this post, I have written about the most simple but very powerful and beneficial Surya Mantra and a most effective Surya Upasana, which is also very simple and easy to practice. 

Simple Surya Mantra and Remedy for Success

The practitioner can practice;any of these two remedies or even both of them because as mentioned above they are so simple that even laypersons can practice them easily to remove all obstacles that are stopping their progress.

Surya Mantra for Success
1] The Surya Mantra given below is a very famous and popular Mantra Chant for appeasing and gaining the blessings of the Sun God. It is also a tried and tested Surya Mantra that has been given time and again on this site.

मंत्र 
ॐ ह्रीं सूर्याय नमः || 
Mantra 
Om Hreem Suryaya Namah || 

2] The Mantra can be chanted as many times as desired by the practitioner. The Mantra Chanting can be started on any day and there is no need to perform any kind of ritual. The Mantra can be chanted for a fixed number of Mantra Chants or as many times as desired by the practitioner while standing, walking, and even while working.

Surya Upasana for Success in Anything
1] This Surya Upasana can be started on any day in the morning.

2] The practitioner should have a bath and take a flower and put a pinch of Kumkum and a few rice grains on the flower and then face the east direction and offer the flower to the Sun. Any kind of fresh flower can be used for practicing this Upasana.

Notes- These paranormal remedies for gaining success can be started on any day. However, Sunday, which is the weekly day of Surya Devta is the best day for starting these remedies.

These remedies should be practiced daily or until the practitioner gets the desired success and is satisfied with the results.

You can see the Hindi language video of this article on our YouTube Channel.

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Comments

  1. १-ऋग्वेद और शुक्ल यजुर्वेद में सूर्यदेव की स्तुति इस प्रकार की गई है --ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव।। समस्त संसार को उत्पन्न करने वाले ---सृष्टि-पालन-संहार करने वाले तथा विश्व में सर्वाधिक देदीप्यमान एवं जगत को शुभ कर्मो में प्रवृत्त करने वाले हे परब्रह्मस्वरूप सविता देव !आप हमारे सम्पूर्ण --आधिभौतिक ,आधिदैविक ,आध्यात्मिक --दुरितों (बुराइयों --पापों )को हमसे दूर --बहुत दूर ले जायँ ,दूर करें ,किन्तु जो भद्र (भला)है ,कल्याण है,श्रेय है ,मंगल है ,उसे हमारे लिए --विश्व के हम सभी प्राणियों के लिए --चारों और से ले आवें ,दें --'यद् भद्रं तन्न आ सुव । '
    २ भगवान् सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं। तत्त्वतः तो वे परब्रह्म हैं। सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य से ही सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति होती है ,पालन होता है और उन्ही में विलय होता है। वे समस्त रोगों को ,विशेषतः नेत्र रोग के दूर करने वाले देवता हैं। भविष्य पुराण के अनुसार जो सूर्यसहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करते हैं ,वे लोक में यशस्वी होकर धन्य हो जाते हैं और चिरायु प्राप्त करते हैं। सूर्यदेव के नामो का पाठ करने से दुःख और दुःस्वप्न दूर होते हैं और बंधन से मुक्ति मिलती है।
    ३ -सूर्य ग्रह स्तोत्र --जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम् ।
    तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ॥
    I pray to the Sun, the day-maker, destroyer of all sins, the enemy of darkness, of great
    brilliance, the descendent of KAshyapa, थे one who shines like the japA flower .
    ४ -आदित्य द्वादशनाम स्तोत्रम् --
    एकचक्रो रथो यस्य दिव्यः कनकभूषणः ।
    स मे भवतु सुप्रीतः पञ्चहस्तो दिवाकरः ॥ १॥
    आदित्यः प्रथमं नामं द्वितीयं तु दिवाकरः ।
    तृतीयं भास्करः प्रोक्तं चतुर्थं तु प्रभाकरः ॥ २॥
    पञ्चमं तु सहस्रांशुः षष्ठं चैव त्रिलोचनः ।
    सप्तमं हरिदश्वश्च अष्टमं तु विभावसुः ॥ ३॥
    नवमं दिनकृत्प्रोक्तं दशमं द्वादशात्मकः ।
    एकादशं त्रयीमूर्तिर्द्वादशं सूर्य एव च ॥ ४॥
    द्वादशादित्यनामानि प्रातःकाले पठेन्नरः ।
    दुःखप्रणाशनं चैव सर्वदुःखं च नश्यति ॥ ५॥
    ५ - सूर्य को जल चढाने के नियम ---
    1. सबसे पहले स्नान के बाद आसन पर खड़े हो जाएं।2. आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें और उसमें मिश्री भी मिलाएं। मान्यता है कि सूर्यदेव को मीठा जल चढ़ाने से मंगल के दोष दूर होता है।3. सुबह के समय सूर्य कि किरणें औषधी के समान काम करती हैं। इसलिए सूर्य को अर्घ्य देने से पहलो सूर्यदेव के हाथ जोड़कर कम से कम 5 मिनट कर सीधे सूर्य को देखें। ये आपको निरोगी बनाता है।4. सूर्य को धीरे-धीरे करके जल चढ़ाएं। ध्यान रखें सूर्यदेव को चढ़ाया जल आपके पैरों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।5. सूर्य देव को चढ़ाया जल जमीन पर गिरने से अर्घ्य का संपूर्ण लाभ आप नहीं पा सकेंगे, इसलिए चढ़ाएं जल को किसी पात्र में एकत्रित कर लें। 6. अर्घ्य देते समय नीचे दिया गया मंत्र 11 या 21 बार बोलना चाहिए-ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय।
    मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा:।। 7. अर्घ्य देते समय थोड़ा-सा जल बचा लें और सीधे हाथ में लेकर अपने चारों और छिड़के। 8. सूर्य देव को चल चढ़ाने के बाद अपने स्थान पर ही तीन बार घुमकर परिक्रमा करें। 9. आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें, जहां खड़े होकर आपने सूर्य को जल चढ़ाया हो। 10. पात्र में एकत्रित हुए जल को मिट्‌टी से भरे गमले में डालें।
    ६ -भगवान सूर्य देव के 6 अद्भुत मंत्र----
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिदिन सूर्य पूजन और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से अवश्य लाभ मिलता है। अगर भाषा व उच्चारण शुद्ध हो तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। यह अनुभूत प्रयोग है।
    प्रतिदिन अथवा प्रत्येक रविवार को दिन नीचे दिए गए मंत्रों में से जो भी मंत्र आसानी से याद हो सकें उसके द्वारा सूर्य देव का पूजन-अर्चन करें। फिर अपनी मनोकामना मन ही मन बोलें। भगवान सूर्य नारायण आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।
    1. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
    2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
    3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
    4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।
    5. ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:।
    6. हर रोज आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ अवश्‍य करें।




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