4 Most Effective Mantras for Marriage of Girls

In this post, I have written about 4 Most Powerful and effective Kanya Vivah Hetu Mantras or Mantras for the marriage of a girl or woman and the procedure for practicing them. All these Mantra are considered to be very effective and beneficial in increasing the marriage prospects of an aspiring bride.

These Vivaha Hetu Mantras can also remove problems, obstacles and other difficulties, like social and economic background or caste, creed and religion barriers and opposition from parents, relatives, and society which is delaying or preventing the marriage of a girl. In addition to these paranormal and astrological obstacles, like Graha Dosh and Mangal Dosh can be resolved.

Suryanarayan Kanya Vivah Hetu Mantra
Specific day for starting the Vivaha Hetu Mantra Prayog has not been given, hence it can be started on any auspicious day or a Sunday because it is the weekly day of the Sun.

Sun God Mantra for Marriage of Women

The 4 steps given below have to be followed for practicing Suryanarayan Kanya Vivah Hetu Mantra Prayog.

1] The Tulsi Plant should be worshipped before starting the Vivaha Hetu Mantra Sadhana.

2] Then, the girl should perform 12 Parikrama of the Tulsi Plant.

3] Then, the girl should offer Arghyam of Jal [ water] with her right hand and Doodh[ milk] with her left hand to Suryanarayan or the Sun God, while chanting the Mantra 12 times.

4] After this, she should sit down, facing the east direction and chant the Mantra 108 times using a Tulsi Beads counting rosary.

This Vivaha Hetu Prayog should be practiced until the desired success in gained and the girl gets married. After, which it should be stopped.

The Mantra Prayog should not be practiced during the Monthly Cycle.

Katyayani Devi Vivah Hetu Mantra

Katyayani Devi Mantra for the marriage of girls

This Katyayani Devi Vivah Hetu Mantra should be chanted for 1 Mala daily in-front of an image or Murti of Parvati Mata after worshipping Parvati Devi.

The reader can also see the Vidhi given by Shri Satya Nidhi in the comments section below this post - Shri Ganesha Totka for Getting Married Quickly

Another method of chanting this Vivaha Hetu Mantra can be seen in a post that was published a few years back - Katyayani Devi Mantra for the Marriage of Women

Gauri Shankaradhargini Kanya Vivaha Hetu Mantra Prayog
You can also see the Vidhi of practicing another very popular and famous Hey Gauri Shankaradhargini Kanya Vivaha Hetu Mantra, in this post - Hey Gauri Shankaradhargini Mantra for the Marriage of Girls

If the aspiring bride does not wish to practice the Vidhi given in that post, she can chant the Mantra for 5 Malas daily after worshipping Parvati Mata. The Mantra Sadhana should be continued until the marriage of the girl.

Kumaraya Mantra for Kanya Vivaha
The Kartikeya or Kumaraya Mantra for Kanya Vivaha can be seen in this post -  Kartikeya Mantra for the Marriage of Girls

This Mantra can also be practiced by adding Om-ॐ at the beginning of the Mantra and Swaha-स्वाहा at the end of the Mantra.

It can be practiced without following the Vidhi given in the above post by chanting the Mantra 125, 000 times in as short a period of time as possible.

Note- The Prophet666.com-Marriage Mantras and Tantra section contains all kinds of Mantras, Yantras, and Remedies for getting married or removing delays and obstacles that are preventing the marriage.

Comments

  1. Neel Sir,

    Can you please tell me which angas are touched in panchanga nyasa ? I know Shadanga nyasa but cannot find this.

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    1. Panchaang Nyaas में हृदय ,सिर,शिखा ,कवच और अस्त्र आते हैं .उदाहण के लिए काली के
      मन्त्र का पंचांग न्यास प्रस्तुत है --
      ॐ क्रां हृदयाय नमः --touch the heart with the right hand .
      ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा --touch the forehead with the right hand .
      ॐ क्रूं शिखायै वषट --touch the headcrown with the right hand .
      ॐ क्रैम कवचाय हुं--touch the shoulder with crossed hands
      ॐ क्रः अस्त्राय फट--snap your fingers over the head in clockwise direction and
      bring it back by placing the index finger and middle finger on the left
      palm .

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  2. ब्रह्म वैवर्त पुराण में जानकी कृत पार्वती स्तोत्र है .इसमें १२ श्लोक हैं .कन्या विवाह में बिलम्ब हो रहा हो ,अनुकूल पति नहीं मिल रहा हो ,तब कन्या को प्रतिदिन सायं माता पार्वती का पूजन करते हुए इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए .संस्कृत में होने पर भी पढ़ने में कठिनाई नहीं है .यथा ,पहला श्लोक है --शक्ति स्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये ,सदा शंकर युक्ते च पतिं देहि नमोस्तु ते .

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  3. Satya Sir,

    Kya aap ye shlok pura bhej sakte hain mujhe, mera email id hai -

    sanskritiverma9874@gmail.com

    Aapki abhari rahungi sir

    ReplyDelete
    Replies
    1. जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रम्

      जानकी उवाच

      शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये ।

      सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते ।।1।।

      सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी ।

      सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते ।।2।।

      हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे ।

      पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते ।।3।।

      सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते ।

      सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले ।।4।।

      सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी ।

      सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये ।।5।।

      परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि ।

      साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते ।।6।।

      क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा ।

      एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते ।।7।।

      लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय: ।

      एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते ।।8।।

      दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे ।

      सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते ।।9।।

      शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि ।

      हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते ।।10।।

      स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम् ।

      नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम् ।।11।।

      इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम् ।

      दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम् ।।12।।

      श्री ब्रह्मवैवर्त पुराणे जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।



      हिन्दी में अर्थ :

      जानकी बोली –

      सबकी शक्ति स्वरूपे ! शिवे ! आप सम्पूर्ण जगत की आधारभूता हैं. समस्त सद्गुणों की निधि हैं तथा सदा भगवान शंकर के संयोग-सुख का अनुभव करने वाली हैं, आपको नमस्कार ह. आप मुझे सर्वश्रेष्ठ पति दीजिए।।1।।

      सृष्टि पालन और संहार के जो बीज हैं, उनकी भी बीजस्वरुपिणी आपको नमस्कार है ।।2।।

      पति के मर्म को जानने वाली पतिव्रतपरायणे गौरि ! पतिव्रते ! पति अनुरागिणी ! मुझे पति दीजिए, आपको नमस्कार है ।।3।।

      आप समस्त मंगलों के लिए भी मंगलकारिणी हैं. संपूर्ण मंगलों से संपन्न हैं, सभी प्रकार के मंगलों की बीजरूपा हैं, सर्वमंगले ! आपको नमस्कार है ।।4।।

      आप सबको प्रिय हैं, सबकी बीजरूपिणी हैं, समस्त अशुभों का विनाश करने वाली हैं. सबकी ईश्वरी तथा सर्वजननी हैं, शंकरप्रिये आपको नमस्कार है ।।5।।

      हे परमात्मस्वरूपे ! नित्यरूपिणी ! सनातनि ! आप साकार और निराकार भी हैं, सर्वरूपे ! आपको नमस्कार है।।6।।

      क्षुधा, तृष्णा, इच्छा, दया, श्रद्धा, निद्रा, तन्द्रा, स्मृति और क्षमा – ये सब आपकी कलाएँ हैं, नारायणि आपको नमस्कार है।।7।।

      लज्जा, मेधा, तुष्टि, पुष्टि, शान्ति, सम्पत्ति और वृद्धि – ये सब भी आपकी ही कलाएँ हैं, सर्वरूपिणी ! आपको नमस्कार है।।8।।

      दृष्ट और अदृष्ट दोनों आपके ही स्वरूप हैं, आप उन्हें बीज और फल दोनों प्रदान करती हैं. कोई भी आपको निर्वचन नहीं कर सकता है. हे महामाये ! आपको नमस्कार है ।।9।।

      शिवे आप शंकर संबंधी सौभाग्य से संपन्न हैं तथा सबको सौभाग्य देने वाली हैं. देवी ! श्री हरि ही मेरे प्राणवल्लभ और सौभाग्य हैं. उन्हें मुझे दीजिए. आपको नमस्कार है ।।10।।

      जो स्त्रियाँ व्रत की समाप्ति पर इस स्तोत्र से शिवादेवी की स्तुति कर भक्तिपूर्वक उन्हें मस्तक झुकाती हैं, वे साक्षात श्रीहरि को पतिरूप में पाती हैं ।।11।।

      इस लोक में परात्पर परमेश्वर को पतिरूप में पाकर कान्त सुख का उपभोग करके अन्त में दिव्य विमान पर चढ़कर भगवान श्रीकृष्ण के समीप चली जाती हैं ।।12।।

      ( श्री ब्रह्मवैवर्त पुराण में जानकी जी द्वारा किया गया पार्वती स्तोत्र पूर्ण हुआ)





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    2. Satyanidhi ji kya is sholka ko divorcee ladkiyaan jo dubara shaadi karna chahti hai vo vo isko padh sakti hai?

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    3. जी हाँ,सुयोग्य पति कामना के लिए वे पाठ कर सकती हैं .रुद्रयामल में "वर लाभार्थ रुक्मिणी वल्लभ मन्त्र "है ,इसे जपना भी हितकारी होगा --
      श्रीकृष्ण की मूर्ति/चित्र के सामने पूजाकर दाहिने हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़ें और जल भूमि में गिरा दें .विनियोग --अस्य श्री रुक्मिणी वल्लभ मंत्रस्य नारद ऋषिः ,अनुष्टुप छन्द ,श्री रुक्मिणी वल्लभो देवता ,मम उत्तम वर लाभार्थं जपे विनियोगः .
      किसी भी सत्कर्म के प्रारम्भ में संकल्प करना आवश्यक है .संकल्प मानसिक न होकर वाचिक होना चाहिए .दाहिने हाथ में जल अथवा जल ,चावल,पुष्प लेकर संकल्प लें कि मैं (अपना नाम लें )
      उत्तम वर की प्राप्ति के लिए रुक्मिणी वल्लभ मन्त्र का प्रतिदिन जाप करूंगी .भगवान् कृष्ण मेरी मनोकामना पूरी करें .(संकल्प अपने ढंग से संशोधित कर सकती हैं )
      निम्न ध्यान पढ़ें और मन में रुक्मिणी वल्लभ का ध्यान करें --
      भगवन देव देवेश ,रुक्मिणी वल्लभ प्रभो ,
      कृपया पति कामायै ,देहि में वरमुत्तमं .
      मन्त्र ---"ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय "
      (नोट -विनियोग के बाद न्यास का भी प्रावधान है ,पर अधिकतर पाठिकाएं न्यास की अनिच्छुक /अभिज्ञ होती हैं ,अतः उसका वर्णन नहीं किया है )

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